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आस्था का सैलाब, बदहाल सडक़ का जाल; कांगड़ा में घंटों जाम से भक्त बेहाल

2026-08-17 13:15:34 | saurabhpathania1 | 6

श्रावण अष्टमी मेले के बीच कांगड़ा पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए दौलतपुर से लेकर कांगड़ा बाइपास तक का सफर परेशानी का सबब बन गया है। शनिवार से इस पूरे मार्ग पर जगह-जगह जाम लगने के कारण वाहन चालक घंटों तक जाम में फंसने को मजबूर हैं। मेले के चलते बाहरी राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के कांगड़ा पहुंचने से वाहनों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है, लेकिन दूसरी ओर सडक़ की बदहाल स्थिति ने यातायात व्यवस्था की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। समेला टनल से लेकर कांगड़ा बाइपास तक सडक़ की हालत लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है। जगह-जगह पड़े बड़े-बड़े गड्ढों और उखड़े हुए सडक़ मार्ग के कारण वाहन चालक अपने वाहनों को बेहद धीमी गति से चलाने के लिए मजबूर हैं। हालत यह है कि कई स्थानों पर वाहन खड्ड रूपी सडक़ पर कीड़े-मकोड़ों की तरह रेंगते हुए आगे बढ़ रहे हैं।

इसी वजह से थोड़ी सी भी अधिक वाहन संख्या बढ़ते ही सडक़ पर लंबी कतारें लग जा रही हैं और यातायात पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। श्रावण अष्टमी मेले के कारण इन दिनों कांगड़ा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु अपने निजी वाहनों, बसों और अन्य यात्री वाहनों से कांगड़ा पहुंच रहे हैं। ऐसे में जिस सडक़ पर सामान्य दिनों में भी यातायात का दबाव रहता है, उसकी बदहाल हालत मेले के दौरान स्थिति को और गंभीर बना रही है। अगर संबंधित विभाग ने समय रहते इस मार्ग की गंभीरता को समझते हुए सडक़ की हालत सुधारने का काम पूरा कर लिया होता तो श्रावण मेले के दौरान लोगों को घंटों जाम में फंसने की नौबत नहीं आती।

वाहन चालकों-स्थानीय लोगों ने प्रशासन तथा संबंधित विभागों से मांग की है कि समेला टनल से कांगड़ा बाइपास तक सडक़ की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तुरंत आवश्यक मरम्मत करवाई जाए। साथ ही मेले के दौरान अतिरिक्त यातायात व्यवस्था की जाए, ताकि श्रद्धालुओं को घंटों जाम में न फंसना पड़े और कांगड़ा आने वाले लोगों का सफर सुगम हो सके। धार्मिक नगरी कांगड़ा में जहां इन दिनों श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब उमड़ रहा है, वहीं बदहाल सडक़ और जाम की समस्या व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन और संबंधित विभाग मेले के शेष दिनों में इस समस्या से निपटने के लिए कितनी गंभीरता से कदम उठाते हैं।