डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (टांडा) में आयुष्मान भारत और हिमकेयर योजनाओं के तहत लगभग 85 करोड़ रुपए का भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है। इस भारी वित्तीय पेंडेंसी में करीब 40 करोड़ रुपए आयुष्मान भारत योजना के और 45 करोड़ रुपए हिमकेयर योजना के शामिल हैं। समय पर बजट जारी न होने के कारण अस्पताल की प्रशासनिक और चिकित्सा व्यवस्थाएं बुरी तरह चरमरा गई हैं, जिससे प्रदेश के इस प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र की साख और कार्यप्रणाली दोनों पर गहरा असर पड़ रहा है।

भुगतान अटकने का सीधा और सबसे बड़ा प्रभाव अस्पताल को सामान और मेडिकल उपकरण उपलब्ध करवाने वाले वेंडरों पर पड़ा है। लंबे समय से पिछला बकाया न मिलने के कारण वेंडरों ने नई सामग्री की आपूर्ति करने से साफ इनकार या आनाकानी करना शुरू कर दिया है। सप्लायर्स की स्पष्ट शर्त है कि जब तक उनकी पुरानी देनदारियों का चुकता नहीं किया जाता, तब तक अस्पताल में नया सामान नहीं भेजा जाएगा। इस गतिरोध के कारण अस्पताल में दैनिक उपयोग में आने वाली आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो गई है।

सप्लाई रुकने का सबसे गंभीर परिणाम मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि अस्पताल में दवाइयों की भारी किल्लत पैदा हो गई है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि लगभग 80 प्रतिशत जरूरी दवाइयां अस्पताल के काउंटर से नदारद हैं। इसके अलावा छोटे-छोटे सर्जिकल उपकरणों के साथ-साथ दस्ताने, सुई, सिरिंज और अन्य प्राथमिक चिकित्सा सामग्री की भी गंभीर कमी हो गई है। ऐसे में अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को लाचारी में ये सभी जरूरी दवाइयां और सामान बाहर के प्राइवेट मेडिकल स्टोरों से ऊंचे दामों पर खरीदना पड़ रहा है।

उल्लेखनीय है कि टांडा अस्पताल केवल कांगड़ा ही नहीं, बल्कि प्रदेश के 6 प्रमुख जिलों—चंबा, मंडी, ऊना, हमीरपुर, कुल्लू और कांगड़ा की करीब 45 विधानसभाओं के 16 लाख से अधिक लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का मुख्य केंद्र है। इतने बड़े वर्ग की निर्भरता होने के बावजूद अस्पताल में उपजे इस मानवीय और व्यवस्थागत संकट से जनता में भारी रोष है। स्थानीय लोगों और मरीजों के तीमारदारों ने प्रदेश सरकार से गुहार लगाई है कि हिमकेयर और आयुष्मान भारत की लंबित राशि का तुरंत भुगतान किया जाए, ताकि आपूर्ति नियमित हो सके और आम जनता को बिना रुकावट इलाज मिल सके।