150 साल पुराने ऐतिहासिक नूरपुर बाल वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (बॉयज स्कूल) को हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (HPBOSE) की मान्यता के साथ पुनः संचालित करने के सरकारी फैसले के बाद पूरे शहर में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस ऐतिहासिक धरोहर संस्थान के दोबारा खुलने की खुशी में शहरवासियों ने अपनी मन्नत पूरी होने पर प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक श्री बृजराज स्वामी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की, हलवे का प्रसाद चढ़ाया ।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि 150 वर्ष पुराना यह विद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और शैक्षणिक पहचान का केंद्र रहा है। स्कूल के बंद होने या विलय की आशंका से शहरवासी बेहद चिंतित थे और इसके अस्तित्व को बचाने के लिए लगातार प्रयासरत थे
स्कूल के अस्तित्व को बचाने के लिए स्थानीय व्यापार मंडल, नगर परिषद के पूर्व प्रतिनिधियों, स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC), अभिभावकों और स्थानीय निवासियों ने एकजुट होकर विरोध जताया। सरकार व प्रशासन से गुहार लगाने के बाद जब बात नहीं बनी, तो शहरवासियों ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) का रुख किया।
न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के दौरान शहरवासियों ने श्री बृजराज स्वामी मंदिर में अरदास लगाई थी कि यदि यह ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान दोबारा बहाल होता है, तो मंदिर में झंडा चढ़ाया जाएगा और हलवे का प्रसाद व भंडारा बांटा जाएगा।
अदालत की कार्रवाई और जन-भावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार और मुख्यमंत्री ने मामले पर पुनः विचार किया और स्कूल को HP बोर्ड की मान्यता के साथ दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया।
मन्नत पूरी होने के बाद रविवार को शहर के गणमान्य व्यक्तियों, अभिभावकों और पूर्व छात्रों ने ऐतिहासिक नूरपुर किले में स्थित श्री बृजराज स्वामी मंदिर पहुंचकर भगवान श्री कृष्ण का धन्यवाद किया। इस दौरान मंदिर परिसर "जय श्री कृष्णा" के जयकारों से गुंजयमान रहा।
शहरवासियों ने सरकार और प्रशासन के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि धरोहर संस्थानों का संरक्षण ही आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखता है।
नूरपुर के छात्रों को अब CBSE और हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (HP Board) दोनों से संबद्ध शिक्षण संस्थानों के विकल्प मिलेंगे।
