विशेष समाचार रिपोर्ट | नूरपुर (हिमाचल प्रदेश)
नूरपुर से सदवां, सदवां से सुलियाली, मलवाल और चंबा जिले के लहरू की ओर जाने वाले मार्ग की दुर्दशा किसी राजनीतिक बयानबाजी की मोहताज नहीं है। हाल ही में सामने आई तस्वीरें सड़क रखरखाव की बदहाली और लोक निर्माण विभाग (PWD) के रवैये की पोल खोलती हैं। यह मार्ग सिर्फ एक साधारण ग्रामीण सड़क नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण स्टेट हाईवे (राज्य मार्ग) है। इसके बावजूद, पिछले 7 से 8 वर्षों से इस सड़क की स्थिति जानलेवा बनी हुई है।
सामरिक और जन-सुविधा की दृष्टि से महत्वपूर्ण मार्ग
यह राज्य मार्ग नूरपुर को सड़क नेटवर्क से जोड़ते हुए सुलियाली के रास्ते जम्मू-कश्मीर, भरमौर, चंबा और प्रसिद्ध पर्यटक स्थल डलहौजी तक सीधा संपर्क प्रदान करता है। हर दिन हजारों की संख्या में स्थानीय निवासी, पर्यटक, आपातकालीन वाहन (एंबुलेंस) और व्यावसायिक वाहन इस मार्ग का उपयोग करते हैं।
वर्तमान स्थितियाँ:
- गहरे गड्ढे और टूटी सतह: वाहन चालकों को कदम-कदम पर नियंत्रण खोने का खतरा बना रहता है।
- कटाव और ढहे किनारे: सड़क के किनारे धंसने और कटाव के कारण गाड़ियों के पलटने की आशंका बनी रहती है।
- बारिश और रात में जानलेवा जोखिम: सड़क पर न तो समुचित जल निकासी (ड्रेनेज) की व्यवस्था है और ना ही खतरनाक मोड़ और कट पर कोई सुरक्षा इंतज़ाम।
7-8 सालों से उपेक्षा: सवाल यह कि जिम्मेदार कौन?
बीते सालों में हिमाचल प्रदेश में सरकारें बदलीं—कांग्रेस और भाजपा दोनों को शासन का अवसर मिला। नूरपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक बदले और मुख्यमंत्री भी बदले, लेकिन इस राज्य मार्ग की स्थिति नहीं बदली।
यह मुद्दा किसी पार्टी विशेष (भाजपा या कांग्रेस) का नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही का है।
लोक निर्माण विभाग नूरपुर मंडल से तीखे सवाल:
- 1. क्या नियमित निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित है? क्या वरिष्ठ अधिकारी सिर्फ वातानुकूलित दफ्तरों में बैठकर फाइलों का निरीक्षण कर रहे हैं या जमीनी हकीकत भी देख रहे हैं?
- 2. स्थायी एक्शन प्लान कहाँ है? यदि सड़क का निरीक्षण किया गया है, तो इसे दुरुस्त करने की दूरगामी योजना क्यों तैयार नहीं की गई?
- 3. अस्थायी मरम्मत (पैचवर्क) क्यों विफल हो रही है? बार-बार मामूली पैचवर्क करके लीपापोती क्यों की जाती है, जबकि असल समस्या ड्रेनेज, सड़क के किनारों और बेस के क्षरण (erosion) की है?
नेताओं और प्रशासन से सीधी अपील: हादसे से पहले एक्शन लें
यह अत्यंत निराशाजनक है कि इस क्षेत्र से होकर प्रदेश के वर्तमान एवं पूर्व मुख्यमंत्रियों सहित कई शीर्ष राजनीतिक नेताओं का आवागमन होता रहा है, फिर भी इस हाईवे के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
- क्षेत्र में एनएचएआई (NHAI) के साथ कंडवाल-जसूर मार्ग के मुद्दे को प्रमुखता से उठाकर सुधार लाने के लिए अकिल रंजीत बख्शी के प्रयासों की सराहना की जा रही है। इससे यह साबित होता है कि यदि इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास हो, तो सड़कों की तस्वीर बदली जा सकती है।
