जसूर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में चल रही अंडर-19 लड़कों की नूरपुर जोन की खेलकूद प्रतियोगिता के दौरान लगभग 500 बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। इस दो दिवसीय प्रतियोगिता में करीब 50 स्कूलों के विद्यार्थी हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन आयोजन स्थल पर न तो स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम नजर आई और न ही कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की नियमित तैनाती की गई। ऐसे में यदि किसी छात्र को गंभीर चोट लग जाती या कोई आपात स्थिति पैदा हो जाती, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।

पत्रकारों के साथ बदसलूकी और मारपीट
प्रतियोगिता की कवरेज करने पहुंचे कुछ पत्रकारों के साथ स्कूल परिसर में अभद्रता का मामला भी सामने आया है। आरोप है कि प्रतियोगिता के दौरान कुछ बाहरी लड़के स्कूल परिसर में घुस आए और विद्यार्थियों के साथ मारपीट करने लगे। इस दौरान एक कथित छात्र ने कवरेज कर रहे पत्रकार को वीडियो बनाने से रोकने का प्रयास किया और उनका मोबाइल छीनने की कोशिश की, जिससे मोबाइल नीचे गिर गया। घटना की सूचना मिलते ही नूरपुर पुलिस मौके पर पहुंची, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था की पोल और अधिक खुल गई। जब पत्रकारों के सामने ही ऐसी स्थिति बन सकती है, तो मैदान में खेल रहे सैकड़ों बच्चों की सुरक्षा कितनी पुख्ता होगी, यह गंभीर चिंता का विषय है।

प्रिंसिपल का दावा: पहले ही दी गई थी लिखित सूचनाप्रिंसिपल का दावा: पहले ही दी गई थी लिखित सूचना
स्कूल की प्रिंसिपल करुणा जमवाल का कहना है कि प्रतियोगिता शुरू होने से दो दिन पहले ही बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए संबंधित विभागों को लिखित पत्र भेजकर सूचित कर दिया गया था। स्कूल के पास तारीख, नंबर, स्टैंप और हस्ताक्षर वाली रिसीविंग भी सुरक्षित मौजूद है। इसके बावजूद, प्रतियोगिता के दो दिन बीत जाने के बाद भी विभागों की ओर से कोई अपेक्षित व्यवस्था नहीं की गई।

प्रिंसिपल ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से यह तर्क दिया गया है कि उन्हें कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि पत्र भेजा गया था, तो वह संबंधित विभाग तक क्यों नहीं पहुंचा, और यदि मिला था, तो उस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? खेल आयोजनों में बच्चों की खेल प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।


Frequently Asked Questions

जसूर स्कूल खेल प्रतियोगिता में सुरक्षा की सबसे बड़ी अनदेखी क्या रही?

जसूर स्कूल में आयोजित खेल प्रतियोगिता के दौरान सबसे बड़ी सुरक्षा चूक यह रही कि वहां 500 से अधिक खिलाड़ियों की मौजूदगी के बावजूद न तो पुलिस बल तैनात था और न ही कोई सुरक्षा कर्मी मौजूद था।

क्या खिलाड़ियों के लिए मौके पर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध थीं?

नहीं, रिपोर्ट के अनुसार प्रतियोगिता स्थल पर बच्चों के लिए किसी भी डॉक्टर या मेडिकल टीम का प्रबंध नहीं किया गया था, जिससे आपातकालीन स्थिति में खिलाड़ियों की सुरक्षा दांव पर लगी रही।

पुलिस प्रशासन की अनुपस्थिति पर क्या सवाल खड़े हो रहे हैं?

इतने बड़े आयोजन में पुलिस की गैरमौजूदगी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना सुरक्षा व्यवस्था के इतने बच्चों को एक साथ जुटाना जोखिम भरा है।

इस आयोजन में कुल कितने विद्यार्थियों की सुरक्षा दांव पर लगी थी?

इस खेल प्रतियोगिता में विभिन्न क्षेत्रों से आए लगभग 500 छात्र-खिलाड़ियों ने भाग लिया था, जिनकी सुरक्षा पूरी तरह से राम भरोसे छोड़ दी गई थी।

रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों के साथ आयोजन स्थल पर क्या व्यवहार हुआ?

सुरक्षा व्यवस्था और सुविधाओं की कमी को कवर करने पहुंचे पत्रकारों के साथ वहां मौजूद प्रबंधन द्वारा कथित तौर पर बदसलूकी की गई और उन्हें रिपोर्टिंग करने से रोकने का प्रयास किया गया।

क्या शिक्षा विभाग ने खेल आयोजन के सुरक्षा नियमों का पालन किया?

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शिक्षा विभाग द्वारा खेलकूद प्रतियोगिताओं के लिए निर्धारित अनिवार्य सुरक्षा मानकों और गाइडलाइन्स का इस आयोजन में उल्लंघन होता हुआ दिखाई दिया।

स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों की इस लापरवाही पर क्या प्रतिक्रिया है?

अभिभावकों और स्थानीय निवासियों में स्कूल प्रबंधन के प्रति भारी रोष है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के साथ इस तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जसूर स्कूल में हुई इस सुरक्षा चूक का मुख्य जिम्मेदार कौन है?

इस लापरवाही का मुख्य जिम्मेदार आयोजन समिति और स्थानीय शिक्षा विभाग के अधिकारियों को माना जा रहा है, जिन्होंने बिना बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा इंतजामों के प्रतियोगिता शुरू करवाई।